अपनों के बीच दिल की बात..आभार मनोज भाई

Posted on Aug 25, 2017 by Administrator

अपनों के बीच दिल की बात..आभार मनोज भाई

 

आपकी तरक्की कइयों को जलाती होगी तो उससे सैकड़ों नहीं हजारों गुणा अधिक युवाओं को प्रेरित करती होगी। फिजीकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के दूसरे राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में आपका आना और सभी के दिलों पर छा जाना वर्षों तक शारीरिक शिक्षकों को याद रहेगा। फाउंडेशन से मेरा जुड़ाव इस नाते हैं कि इसके फाउंडेशन के सदस्यों में से मैं भी एक हूं। हालांकि मैं शारीरिक शिक्षा से नहीं आता हूं। लेकिन मेरा यह मानना है कि भले ही यह विषय कोई पढ़े या न पढ़े वह गाहे-बगाहे इससे जुड़ा रहता है। भारत को फिट रखना है यहां के लोगों मेें फिट रहने की संस्कृति पनपानी है तो शारीरिक शिक्षा को पहली कक्षा से अनिवार्य बनाना होगा। नहीं तो एक दिन भारत सभी बीमारियों की राजधानी जरूर बन जाएगा। जो कोई नहीं चाहता है। खैर, मैं बात कर रहा था भाई मनोज तिवारी जी की। तिवारी जी को पत्रकार के नाते कई बार कवर करने का मौका मिला। लेकिन यहां बात कुछ और थी।

प्रगति मैदान में पेफी के अवार्ड समारोह में मुख्यातिथि के रूप में पधारे भाई मनोज तिवारी जी ने बताया कि वे भी शारीरिक शिक्षा प्राप्त कर एक अदद नौकरी के लिए हर तरफ भटके। बीपीएड और एमपीएड करने के बाद नौकरी की तलाश शुरू। जब वे यह बात कह रहे थे उनका गाया यह गीत मेरे मन में उमड़ घुमड़ रहा था कि एमए में एडमिशन लेकर बेटवा कंपटीशन देता..हालांकि आज भी हालात कमोबेश इस गाने की तरह है। मनोज जी ने कहा कि मुझे आज असीम खुशी हो रही है। जिस फील्ड में जाने के लिए सोचा था। लेकिन संयोगवश नहीं जा सका। आज उन शारीरिक शिक्षकों के बीच वर्षों बाद आकर असीम प्रसन्नता हो रही है। नौकरी के तलाश के दौरान एक कार्यक्रम में गाना गा रहा था। किसी को आवाज पसंद आई। एक एलबम बना। वह हिट हो गया। फिर एक भोजपुरी फिल्म बनी। वह हिट होगी एक्टर बन गया। राजनीति के क्षेत्र में आने के बाद की स्थिति तो आप सब जानते ही होंगे। लेकिन आज के दिन मेरे लिए विशेष है। संयोग से 1993 के बीच आया है। कभी बीपीएड और एपमीएड कर नौकरी की तलाश करने वाला यह शख्स आज अपने ही फील्ड के साथियों को पुरस्कार वितरित कर रहा है। इससे सुखद संयोग कुछ नहीं हो सकता है। उन्होंने पुरस्कार समारोह में उपस्थित डॉ. उत्पल जी की ओर इशारा कर बोला कि आप मेरे गुरू के भी गुरू हैं। इस कार्यक्रम में पहुंच कर कॉलेज के दिनों की याद आ गई। उन्होंने इस मौके पर फिजीकल एजुकेशन फाउंडेशन इंडिया का राष्ट्रीय संरक्षक बनाना भी स्वीकार किया। 

बधाई पेफी की सभी टीम को जिनका कारवाँ चार सदस्यों से शुरू हुआ था। अब एक दशक में देश के 22 राज्यों में फैल चुका है।

 

पंकज मिश्रा

मीडिया प्रभारी - फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया

राजनितिक सम्पादक - पायनियर (हरियाणा)

 

No tags added.