शारीरिक शिक्षा के साथ अन्याय आखिर कब तक ...

Posted on Aug 13, 2017 by Administrator

शारीरिक शिक्षा के साथ अन्याय आखिर कब तक ...

दिनांक 7 अगस्त 2017 को दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) के द्वारा दिल्ली सरकार के स्कूलों के लिए जब बड़ी संख्या में रिक्त पोस्ट भरने के लिए आवेदन माँगने की घोषणा हुई तो पूरे शिक्षा जगत ने इस पहल का स्वागत किया, इसे हाथो हाथ लिया गया. सभी ने दिल्ली सरकार, राज्यपाल के प्रयास को सराहा. बेशक यह नियुक्तियां माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार हो रही है लेकिन फिर भी पहली बार इतनी भारी मात्रा में एक साथ इतनी पोस्ट का आना ना सिर्फ बेरोजगारों के लिए राहत की बात है बल्कि इससे शिक्षको की कमी से जूझ रहे और दिल्ली में हांफती हुई शिक्षा व्यवस्था को पंख लग जायेंगे. नए और उर्जावान शिक्षक छात्र - छात्राओं को अच्छे से पडाएंगे.

शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र को भी बड़ी उम्मीद थी इन भरतियों से.

महीनो, सालों से इन्तजार कर रहे बेरोजगार शारीरिक शिक्षा के स्नातक और परा स्नातक छात्र छात्रा खुश हो गए, फोन, फेसबुक व्हात्ट्स अप्प पर बधाई संदेशों के दोर शुरू हो गए, लोगो को लगा की उनकी सरकारी नोकरी पाने की इच्छा पूरी हो गयी, घर वाले, मोहल्ले, पड़ोस वालों को शारीरिक शिक्षा में कैरियर की असीम संभावना दिखने लगी. और दिखती भी क्यों नहीं करीब 919 पोस्ट TGT की और 160 पोस्ट PGT की सिर्फ शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र की ही थी. 

लेकिन जब पूरा विज्ञापन देखा तो शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोग सन्न रह गए, हैरान थे वो लोग जिन्होंने 30 साल से ऊपर की उम्र पूरी कर ली थी, क्यूंकि TGT और PGT दोनों ही विषय में आयु सीमा 30 साल की निर्धारित की गयी थी. हैरान और परेशान करने वाली बात यह है की दूसरे सभी विषय में TGT के लिए 32 साल की आयु और PGT के लिए 36 साल की आयु निर्धारित की गयी है. 

फिर शारीरिक शिक्षा के साथ यह अन्याय क्यों ?

क्यों शारीरिक शिक्षा की भरतियों में TGT और PGT दोनों ही के लिए आयु की एक ही सीमा निर्धारित की गयी है

(केवल 30 साल)

क्या 30 साल से ऊपर का शारीरिक शिक्षक बच्चो को पदाने में असमर्थ होगा?

या

हमेशा की तरह आज भी इस विषय को दोयम दर्जे का समझते हुए ऊपर बेठे हुए अफसर लोग जो भी निर्णय लेंगे, उसे सभी लोग मंजूर कर लेंगे.

क्या शारीरिक शिक्षा की आवाज को कोई सुनेगा?

 मुझे इस बात से कोई समस्या नहीं है की एक शारीरिक शिक्षक के लिए 30 साल की आयु क्यों निर्धारित की गयी है, मुझे समस्या इस बात से है की दूसरे विषय और हम में क्यों अंतर किया गया है. यदि सभी विषयों की TGT और PGT की आयु बराबर होती तो में ए लेख नहीं लिखता और ना ही इस बात को कहता. 

अब वक़्त है की सभी शारीरिक शिक्षा से जुड़े हुए लोग एक मंच पर आगे आये, अपनी बात सरकार और अथॉरिटी के सामने रखे, विरोध जाहिर करें और जरूरत पड़े तो अपने हक की लड़ाई लडे अन्यथा एक दिन ऐसा आयेगा की शारीरिक शिक्षा का नाम लेने वाला नहीं होगा. 

यही वक़्त है........ लड़ने का 

फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया ने इस दिशा में एक प्रयास उठाया है, लिखा है राज्यपाल और सरकार को.  आप भी जुड़े इस कार्य से ....